जहां अपने पन का एहसास ही ना हो, वहां से पीछे हट जाना बिल्कुल सही है,खुदा की रहमत सदा बनी रहे,और कुछ ना चाहिए,जहां कोई अपना समझे ही नहीं,वहां सफाई देना सही नहीं है,सिर्फ ख़ामोश होकर देखो तुम्हें अपना समझता कौन है,बाकी सब रब और वक़्त पर छोड़ देना उचित है,वो सब देखता है,सब जानता है,सब समझता है,कौन अपनी जगह सही है और कौन अपनी जगह गलत,वहां देर है अंधेर नहीं,trust on god
@kavishala
