अगली बारिश के लिए पैसे अभी से जोड़ लो,
माँगे हुए छाते में पूरी बारिश नहीं गुज़ारी जाती
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क्या हुआ अगर वो नाराज़ हो कर डाँट देती है
वो माँ ही है जो अपने हिस्से का भी बाँट देती है
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सब कुछ है पर घर से निकलना बंद हो गया,
बताओ यूँ भी कोई दरवाज़ा बंद करता है!
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पैदा हुए थे इंसानो की तरह,अब ज़रूरतों में ढलते जा रहे हैं!
काम पड़ सकता है कभी भी,रिश्ते भी लोग इसी लिए निभा रहे हैं!


