तुम्हारे दर्द की दवामैं बन जाऊँकुछ कसर बाकी ना होप्यार में तुझसे इतना कर जाऊँपरवाह नहीं दुनियां को निज केअलावामैं तो तेरी खातिर जब जी चाहेतब मर जाऊँ
तुम्हारे दर्द की दवामैं बन जाऊँ
कुछ कसर बाकी ना होप्यार में तुझसे इतना कर जाऊँ
परवाह नहीं दुनियां को निज केअलावा
मैं तो तेरी खातिर जब जी चाहेतब मर जाऊँ