रामलला आज पधारे, सजी अयोध्या नगरी सारी ।

बसे राम मन में हमारे, आँखो में छवि प्यारी ॥


बिराजे अपने घर राम, प्राण प्रतिष्ठा हुई आज ।

लेकर अपने दशावतार, बैठे गर्भगृह में आज ॥


लड़ाई थी यह न आसन, अनगिनतो के प्राण न्यौछावर ।

आज मिली उन्हें शांति, जब देखा यह दृश्य मनोहर ॥


देख प्रभु के राजीवनैना , भर आई आज आँखे मोरी ।

मन करता है बस अब इतना, पहुँचू दर्शन को तुम्हारी नगरी ॥