पत्नी जी आई चादर खिसकाई, बोली अभी तक सो रहे हो

कीमती समय खो रहे हो , बहार आके देखो क्या क्या हो रहा है |

 

मौसम अपना मिजाज बदल रहा है, देखो कितना चमक रहा है

चारों तरफ सफेद मकमली चादर बिछ रही है, मौसम की पहली बर्फ पड़ रही है |


पत्नी प्यार से बोल रही है, थोड़ी रोमांटिक हो रही है

समझ गया दाल मै कुछ काला है, अब बकरा काटने बाला है |

 

किंतु उकसाहट मुझे रोक न पाई, बोलो भगयवान, मुझे क्या करना है

झट से बोली चलो बहार चलना है, मौसम का मजा लेना है |

 

बहार ले जाते ही फोन दिखा कर बोली,, तुम भी मुझे उठाओ,देखो सब उठा रहे है

मुझे भी फोटो खिंचवानी है, फैसबुक और व्हाट्सएप पे लगानी है |

 

ओ मेरी मुमताज,, यह तो पुराना हो गया

पहले से ही कईयों ने उठा लिया, ,हम कुछ अलग करते है |


मैं तो टाल रहा था, अपनी जान बचा रहा था,

इतने में पत्नी जी तैयार हो कर आगई, प्यार से बोली, हम क्या कर रहे है |


मैं सभला कुछ सेकंड रुका फिर बोलो, सब अपनी अर्धागिनी उठा रहे है

हमे थोड़ा सा फेर बदल करना है, तुम्हें मुझे मतलब अपने प्राणेश को उठाना है |

 

इतना सूनते ही पत्नी जी भड़क गई

आंखें लाल भौं तन गई, अपने पैरों को मेरे पैरों पटक गई |

 

खाने की भी हड़ताल हो गई,

मुझे उठाकर खुद चादर तान सो गई, कितने नीरस हो, कुछ येसा बड़बड़ाई |


लगा मुझे अब कुछ ज्यादा हो गया , अब मनाने का समए आ गया है

प्रेम कोई समझौता नहीं , प्रेम सत्य, निष्ठा, आस्था और भरोसा है |

 

हमारा तो सात जन्मों का रिश्ता है,,

इस जन्म में क्या तुमको तो सात जन्मों तक उठाना है |