ऐसा मैंने जाना जग में, तुम से बड़ा न कोई माँ,
जग में पाया जो भी मैंने, सब चरणों में झुककर माँ |
कब तुम उठती कब तुम सोती, कभी पता नही चलता माँ
पर हम सब को सुबह सुबह तुम ही ने तो उठाया माँ |
तुम क्या खाती क्या पीती, कब हमने पूछा माँ
सदा रुचिकर भोजन, हम सब को खिलाती माँ |
कभी नही देखा तुमको, खाली बैठे आराम करते माँ
खूब सुलाया हम सब, लोरिया गा गाकर माँ |
घर से निकलते ही, सारे शगुन मनाती माँ
रिश्तो को निभाना, तुमने ही सिखलाया माँ |
बुहत दूर है अब, कभी कभी मिल पाती माँ
घर छोड़ना रास न आया, पास नही रह पाती माँ |
ऐसा मैंने जाना जग में, तुम से बड़ा न कोई माँ,
जग में पाया जो भी मैंने, सब चरणों में झुककर माँ |

