फागुन है छाया ऐसा, मन में है उमंग आज।
कहता हूँ मैं दिल को, दिल से मिलाइये॥
तनिक न बच सके, छुटने न पाये कोई।
भाग़ना चाहे बच के, तो झट से पकड़िये॥
गोरे गोरे गालों को, रंगने की चाह रख।
अबीर गुलाल रंग, सब प्यार से लग़ाइये॥
सबसे खेलनी हैं कब से खेलनी हैं होली।
त्यौहार मन भावन, यह यादगार बनाइये॥
राधा संग खेली, श्याम ने होली जैसे।
वैसे आज आप भी, हमारे संग खेलिये॥
सब रंग रंगे दिखे, मन को प्रिय लगे।
रंगो की वैहार अब दिल पर दिखाइये॥
यूँ तो मन से कहूँ, रंग भर-भर कहूँ।
होली के रंग, मिल जुल के ही खेलिये॥
आप भी गाएँ आज, हम भी नाचे झूम झूम।
होली के त्यौहार पे, मदहोश हो जाइये॥
अंबर है सतरंगी हम सब भी रंगे रंगे।
होली त्यौहार सब को मन में बसाइये॥