हमे मिले सालों हो गए बाते भी पुरानी हो गई
फिर भी ऐसा नहीं की तुम्हारी कभी याद नही आई |
कॉलेज के दिनों की बात तुम्हारे ख्वाबों में राहत था
तुम ही तो थी जिसे मै घंटों देखा करता था |
थोड़ा नादान था प्यार कर बैठा था
तुम्हारी तस्वीर अपने आखों में बना बैठा था |
मुश्किले तो थी तुम को बताए कैसे
अपना प्यार तुम तक पहुंचाएं कैसे |
कहने को तो बगल के ही घर में रहेती थी
पर अपनी ही ज़िंदगी में मसरूफ़ थी |
शुक्रगुजार हूँ तुम्हारी उन चंद सहेलियों का
तुम्हें मिलवाने तेरे दिल में प्यार जगाने का |
याद है मुझे तुम्हारा जन्मदिन था
एक ही कविता ने दिल चुरा लिया था |
अब हम साथ थे , हाथों में हाथ थे
खुशीयों भरे दिन रात थे , खटे मीठे जज़्बात थे |
तुम्हारे सिगनल भी अब समझ में आने लगे थे
हरा दुपट्टा देख झट से छत पे जाने लगे थे |
छोटे सहरों में लाइट जाने के अपने ही मजे थे
अँधेरी रात में चाँद देखने के अपने ही मजे थे |
चाय की चुस्किया और तेरे बालों का सैलाना
सोच कर अपना इश्क, अब रोने नही लग जाना |
गलती ना तुम्हार थी
ना गलती हमारी थी |
इस संसार में अपना मिलन सम्भव न था
मान्यताएँ जमाने की पर अपना प्यार तो सच्चा था |