कविता सृजन करती है-
एक दुनिया,
स्त्री सृजन करती है-
एक दुनिया,
कविता में वो सारे भाव हैं,
जो स्त्री में हैं।
तो क्या मैं कह सकता हूँ,
कि कविता एक स्त्री है? या
फिर स्त्री एक कविता है,
जिससे मैं प्रेम करता हूँ।
प्रकृति एक रचयिता है। प्रकृति के अंदर रचना करने का भाव, गुण और क्षमता है। जो रचना कर सकता है वही सही मायने में ईश्वर है। शेष सभी लोग रचनाकार के दिए हुए उपहार का भोग करते हैं। रचयिता शक्तिशाली है। प्रकृति ने स्त्री को रचना करने की शक्ति दी है। वो रचती है इंसान, बनाती है इंसान, और उसके साथ रचना करती है एक नए संसार की। स्त्री भाव का निर्माण करती है, अपने इर्द गिर्द अपनी ही दुनिया बुनती है एक स्त्री!


