सरिता सूखी इन अँखियन की,

दशा बरनि जाय नहिं मन की

तुम्ह बिन प्रात न रात सुहाये,

ज्यौं बिन नीर मीन अकुलाये

मम् हृदय-पटल तव छवि उतारौं,

आवौ प्रीतम, मैं राह निहारौं…




ब्रजभाषा ( बुंदेली और अवधी मिश्रित) में ये काव्य प्रस्तुत है।

ब्रजभाषी प्रेमी की पुकार है कि प्रिय जल्दी आओ। तुम्हारे वियोग में मेरी क्या हालत हई है।

प्रेमी(भक्त) अपने प्रीतम (भगवान) को प्रेमपूर्वक पुकार रहा है।