छद्म हैं सभी नज़ारे संसार के,

खजाना छुपा है उस पार दीवार के

संबल धैर्य का अंततः जिसके पास है,

मानो या न मानो शक्ति उसके साथ है

जागो, उठो, सम्हलो, सदा खड़े रहो,

निज शक्ति को पहचान कर बढ़ते चलो


नदी रुकी नहीं कभी पत्थरों के चोट से,

न आसमाँ झुका है तूफानों के शोर से,

हर दर्द को अपने जुनूँ से चीर कर,

जीतोगे तुम्हीं ये बात दोहराते चलो


सुनो वीर ! कफ़न बाँध के माथे चलो,

बैरियों को अपनी शक्ति दिखलाते चलो,

रास्ते में कभी भी थक कर न तुम बैठना,

अपनी जीत अपने कर्म से साधे चलो !!!