
साहिल पर खड़े होकर,
कर रहा हूँ इंतज़ार,
कभी तो कहीं से कोई,
भँवर आएगी-
और ले जाएगी मुझे
अपने संग !
मुझे उस भँवर से बात करनी है,
“क्या तुम भी हो,
साहिल पर खड़े किसी
माँझी की तलाश में ?
जिसे समझा सको
अपनी प्यास, जो आज तक
नहीं बुझी ?”
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