प्रेम हो या द्वेष हो

संकल्प हो या दर्प

वृत्त हो या वित्त हो

सदा विचार विमर्श

धर्म हो या हो अधर्म

नित हो परम् कर्तव्य

चाहे भाव हो या अभाव हो

हो खेद या हो हर्ष

जारी ही रहता है सदा

अस्तित्व का संघर्ष