बेइंतहा इश्क़ के अधूरे सपने,

अधूरी बातें, अधूरी यादें और अधूरे वादे !

फ़र्क बस इतना पड़ता है,

कि ये अधूरापन मुझे चीर के रख देता है !!!




अधूरापन एक प्रकृति प्रदत्त दोष है जो सभी जीवों में उपस्थित होता है, जिससे इंसान को इश्क़ की चाह होती है। और इश्क़ का अधूरापन तो असहनीय है।

जग साक्षी है कि इंसान प्यार करने से ज्यादा प्यार पाना चाहता है। यानि की कोई उसे प्यार करे ये इच्छा, किसी को प्यार करने से भी ज्यादा प्रबल होती है।