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बुढ़ापा


कोई पूछता नही हाल कैसा है,किसे बताए दीवारों जैसा है,

खालीपन, वीराना शोर करते है,कही जा भी नही सकते दरख़्तो जैसा है,,

है नही कुछ दुआ के सिवा,घर कोई आता नही खंडहर जैसा है,,

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