●चाहे वह गिनती में एक था, पर दिल में वही सब था
तुम्हारा होगा कोई कन्हैया मेरा तो वही रब था।
था राबता मेरा भी, दिल का जो ज़ुबान से है
था राबता मेरा भी होता जो दिल का जान से है।
महसूस तो होए पर दिखे नहीं "बन चुका वह हवा है",
इस चोट पे कपड़ा मत डा-लो "हवा ही इसकी दवा है"
वह शाम को मिलने आता था या शाम उसी वक्त आती थी
अब वो ना आए तो कोई नहीं, "पर इस शाम को जगह दो"।
-✒पवन नागरवाल


