ना जानें क्यों इंसान दोस्ती में वफादारी से वफ़ा कर नही सकता,

रिश्तों को रिश्ते की तरह निभा भी नहीं सकता और खंज़र घोपता हैं।।

*✍️पाटोदिया मुकेश✍️*