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मैं तो फ़क़ीर मलंग की तरह उसके दर पे गया था दिल में लिये प्रेम, उसने तो उसे समझ के जिहाद दहलीज़ का दरवाजा ही बन्द कर दिया।। ✍️पाटोदिया मुकेश✍️
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