लो फिर से ये बादल आए
पुरवाई के संग में उड़कर
जल प्रसन्नता भीतर भरकर
श्वेत,कृष्ण और रक्त वर्ण में भांति भांति के रूप बनाए
लो फिर से ये बादल आये।
सब मन भावन प्यारा सावन
दादुर बोले चातक गाता
जिनके स्वर सुन बहक कलापी
मंत्रमुग्ध हो नृत्य दिखाता
प्यासी मिट्टी भी जल पीकर सौंधी सुगंध सन्देश सुनाए
लो फिर से ये बादल आए। (1)
नभ,नदिया,वायु उपवन,वन
पथ,पर्वत, पुष्कर सजीव
भूमिपुत्र भी आगे बढ़कर
गाते सुन्दर आगम गीत
तुम्हारा स्वागत ही करने को धरा हरित श्रृंगार सजाए
लो फिर से ये बादल आए। (2)
