एक दिन हुई थी एक विचित्र बात,
समाचार आया गुरुजी का,
था समाचार, एक लड़की को परेशानी है
देखना उसको, उसकी हर बार की कहानी है,
संपर्क कर उसने मुझे, मुझ महोदय कह संबोधित किया,
सुनी न थी पहले कभी, ऐसी मधुर आवाज,
थी उसमें एक अजीब सी तपिश, एक अजीब सी सुरसुराहट,
सुन मन तो कहता, सुनता जाऊँ, सुनता जाउँ, सुनता जाउँ,
कहता, है कोई पुराना बंधन इससे,
कहता, है कोई पुराना संबंध इससे,
कहता, अजीब सी शाँति मिल रही,
फिर शाँति में सहसा मन को एहसास हुआ,
थी उसमें एक अजीब सी चिंता,
एक अजीब सी घबराहट,
कहती समस्याओं से है पुराना नाता,
कहती इस बार की समस्या है बड़ी,
सुन समस्या को, मैं समझ गया,
शायद इसलिए ही गुरुजी ने किया किनारा,
अब समस्या थी बड़ी जटिल,
दोंनो ने की बहुत माथापच्ची,
फिर जाकर समाधान मिला,
फिर हमने संपर्क को विश्राम दिया,
आज तक समझ न आया, क्या था वो,
एक दिन हुई थी एक विचित्र बात।
...पारुष अग्रवाल✍️

