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सरपरस्ती!!


ये बारिशें जिस तरह रूह पर बरसती हैंनेमते खुदा की बन रही किश्ती है

दरिया ए इश्क़ जो हो रहा गम कदाइश्क ऐसा, उस रब की ही सरपरस्ती है

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