चल खर्च कर ले,जो कुछ भी हाथों में है
ज़िंदगी बाकी जो भी,तेरे मेरे खातों में है!
उम्र भर की खामोशी ना बची रह जाए यूँ ही
यक़ीनन इश्क़ अब भी कहीं,उन चुप सी बातों में है!
रखे है चंद कुछ गोल से, दिल की गुल्लक में
खनक जिनकी अब भी,तेरी मेरी रातों में है!

चल खर्च कर ले,जो कुछ भी हाथों में है
ज़िंदगी बाकी जो भी,तेरे मेरे खातों में है!
उम्र भर की खामोशी ना बची रह जाए यूँ ही
यक़ीनन इश्क़ अब भी कहीं,उन चुप सी बातों में है!
रखे है चंद कुछ गोल से, दिल की गुल्लक में
खनक जिनकी अब भी,तेरी मेरी रातों में है!