रात की अंजुमन पर
कुछ खारिशें है !
लगता है कोई
चाँद खुरच कर गया है !
खाली सी पड़ी है जिस तरह से
तारों की गालियां
चाँद इन्ही में कहीं
अपना ज़ख़्म रख कर गया है !
रात की सुबकियों में
जिस्म अब नदी सा है
उतर रहा है रूह में
यकीनन बद्दी सा है
आज फिर कोई दर पर खुदा के
इश्क़ में थककर गया है !रात की अंजुमन पर
कुछ खारिशें है !
लगता है कोई
चाँद खुरच कर गया है !
खाली सी पड़ी है जिस तरह से
तारों की गालियां
चाँद इन्ही में कहीं
