तेरी आँखों के काजल में सना हैइश्क़ मेरा जो चाँद सा बना है !ईद कोई मुकम्मल हो रही हैजिस्म जिस तरह रूह में फना है !
तेरी आँखों के काजल में सना हैइश्क़ मेरा जो चाँद सा बना है !
ईद कोई मुकम्मल हो रही हैजिस्म जिस तरह रूह में फना है !