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फ़लसफ़ा!!


तुझे खोकर कुछ भी तो नहीं पाऊंगी मैंदर्द में तेरे भला कैसे मुस्कुराऊंगी मैं!

मेरी जिंदगी का इक ही फ़लसफ़ा तू हैतेरे सिवा खुद से भी कुछ ना चाहूंगी मैं!

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