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आज़ाद कर


नाशाद कर बर्बाद करतू बस मुझे आज़ाद कर

आसान माना है नहीसौ कोशिशों के बाद कर

दे ख़ाक में मुझको मिलातू घर तिरा आबाद कर

पारुल सिंह 'नूर'

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