दिन आजकल यूं ढल रहे हैं, मत पूछिएहसीनों से चेहरा छुपाये चल रहे हैं, मत पूछिएआवारगी बस्ते में डाल कर, घर रख आएशरीफ बनकर बाजार मे निकल रहे हैं,मत पूछिए
दिन आजकल यूं ढल रहे हैं, मत पूछिएहसीनों से चेहरा छुपाये चल रहे हैं, मत पूछिए
आवारगी बस्ते में डाल कर, घर रख आएशरीफ बनकर बाजार मे निकल रहे हैं,मत पूछिए