प्रेम
है निश्छल जो वो प्रेम है।
किसी के लिए समर्पण वो प्रेम है।
प्रिय कोई जो यादों में आए वो प्रेम है।
शब्द जो कानों में रम जाए वो प्रेम है।
प्रेम.......
मरा नहीं कभी जो वो प्रेम है।
छल से जो मुक्त वो प्रेम है।
सुर,संगीत जो खुशियां लाए वो प्रेम है।
पर्व कोई ऐसा जो एकता बनाए वो प्रेम है।
प्रेम........
मां की लोरी जो शिशु को मुस्काए वो प्रेम है।
प्रकृति का रूप जो मन भाए वो प्रेम है।
किस्से इसके भी अनेक है।
जो समेटा ना जाए वो प्रेम है।


