हम दोस्त कमीने
बचपन के हम दोस्त कमीने
दिन भर हम उत्पात मचाते
पड़ोसी काका, दादी को सताते
छुपन छुपाई, घोड़ा गाड़ी
करतब रंग रंगीले हम दिखलाते
हम दोस्त कमीने......
चाट के ठेले नुक्कड़ मेले
भरी दोपहर जामुन के स्वाद
आपस की वो मुक्कलात
प्रेम के फिर से वो समझौते
बारिश में हम और फुटबाल
मेघ के आने का करते इंतजार
हम दोस्त कमीने......
अब दोस्ती बस है व्यापार
दोस्त वहीं जो बुरा निभा दे
समय समय पर प्यार जता दे
मेरे लिए ये जीवन आधार
सभी दोस्तों को मेरा प्यार
काव्य कृति
प्रकाश जोशी
