बारिश की व्यथा




मै बारिश सुखी धरा को


भीगा देना चाहती हूं


मै धरा को भीष्म गर्मी से


मुक्त करना चाहती हूं




मै बारिश...




मै रस की फुहार से


पुष्प को नया जीवन देना चाहती हूं


बरसो के सूखे तालाब को


भर देना चाहती हूं अपने प्रेम रूपी जल से




मै बारिश....




जो मेरी आस में भीगने को तैयार


ये पंछी, ये जन्तु , सूक्ष्म जीव


इनका सब्र अब पूरा करना चाहती हूं




मै बारिश...




मै ऐसे प्रेमी जो मेरे आंचल


तले चल कर भीगना चाहते है


किसी देहात के हाथ की


मीठी चाय की चुस्कियां


बारिश में लेना चाहते है


मेरे आगमन पर पूरा हो


सबका सपना ऐसी कामना है मेरी।


काव्य कृति


प्रकाश जोशी