चंद लोग कहते हैं मुझे, यह दुनिया प्यारी लगती है,
किसी पल लगता है मुझे, यह खुद से हारी लगती है...
एक और देखू तो दुनिया, अर्श को छूं रही मगर,
दुजी और देखू तो गरीबी, ख़ुद बेचारी लगती हैं...
थोड़ा वक्त खुद को दिया करो, इसमें भला क्या हर्ज हैं,
मगर यहां तो सभी को, व्यस्त रहने की बीमारी लगती हैं...
