अनजाने से हाथों में, मेरा हमसफ़र सहारा कोई मिल गया,
दिल के नगरमें मुझे, मेरा मोहब्बत का किनारा कोई मिल गया...
बात थी, की हम चाय पे मिलेंगे एक मुलाक़ात के लिए,
कुछ तो नज़ाकत थी उनके अलफाजों में, जो उन्हें मांगा हर सौगात के लिए,
हर दुआ में ख़ुदा से उन्हीं की मन्नत कर रहा हूं मैं,
चाहता हूं उनको जीवन में मेरी हर आयत के लिए,
खुदा ए रहमत की बदौलत, मुझे मेरा इश्क़ दिलदारा कोई मिल गया...
दिल के नगरमें मुझे, मेरा मोहब्बत का किनारा कोई मिल गया...
