सुबह सुबह एक हुस्न परी से बात हुई है
रात में उसके बादल भर बरसात हुई है
पंछी कितने खिड़की पर जा बैठे उसकी
जहां से उसकी सुब्ह की शुरुआत हुई है
parag.write.feelings


सुबह सुबह एक हुस्न परी से बात हुई है
रात में उसके बादल भर बरसात हुई है
पंछी कितने खिड़की पर जा बैठे उसकी
जहां से उसकी सुब्ह की शुरुआत हुई है
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