वह जो हिंसा को ज़ायज कह रहे हैं 

उनकी जय हो

वह जो निर्दोष "उनको" कह रहे हैं

उनकी जय हो।।


वह जो सर्वत्र शांति देखते हैं 

उनकी जय हो

वह जो लाशों में क्रांति देखते हैं 

उनकी जय हो।।


वह जो भारत के टुकड़े कर रहे हैं 

उनकी जय हो

वह जो नित झूठ कोई गढ़ रहे हैं

उनकी जय हो।।


वह जो भगवा हरा ही देखते हैं 

उनकी जय हो

वह जो खंडित धरा ही देखते हैं 

उनकी जय हो।।


वह जो गमछे से बुद्धि आंकते हैं 

उनकी जय हो

वह जो कपड़ों से मजहब भांपते हैं 

उनकी जय हो ।।


वह जो आज़ादी के नारे दे रहे हैं 

उनकी जय हो 

वह जो कड़वे छुहारे दे रहे हैं 

उनकी जय हो ।।


वह जो बंगाल में होकर भी चुप हैं 

उनकी जय हो 

वह जो दिल्ली में धरना दे रहे हैं 

उनकी जय हो ।।


वह जो टी.वी में बस चिल्ला रहे हैं 

उनकी जय हो 

वह जो ठंडक में लाठी खा रहे हैं 

उनकी जय हो ।।


कहूँ सच तो अभी पहचानना है 

किसकी जय हो 


वह जो खामोश रहना जानते हैं 

उनकी जय हो या 

जो बस सुन के कहना जानते हैं 

उनकी जय हो ।।

©kaladharpankaz