संसाधन की किल्लत मारे
कदम-कदम पर ज़िल्लत मारे I
दफ्तर जाऊं बाबू मारे
अपना जीवन राम सहारे II
पूष माह में ओला मारे
शेष सांड का मेला मारे I
घर में जब-तब बेटा मारे
अपना जीवन राम सहारे II
पटवारी का डोरा मारे
साहूकार का छोरा मारे I
थाने जाऊं दरोगा मारे
अपना जीवन राम सहारे II
चोटों को पुरवैया मारे
अस्पताल की टिकिया मारे I
काम करा के मुखिया मारे
अपना जीवन राम सहारे II
नेता मारे चेला मारे
जितना सारे मिलकर मारें I
कोटेदार अकेला मारे
अपना जीवन राम सहारे II
समधी जी की घुड़की मारे
बिटिया की हर सिसकी मारे I
जब-तब कोर्ट कचेहरी मारे
अपना जीवन राम सहारे II
रात गए बेचैनी मारे
ज़रा-ज़रा कर खैनी मारे I
दुःख हमको पुश्तैनी मारे
अपना जीवन राम सहारे II
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