ये तुम जिनको मसीहा मानते हो 

तुम्हे तड़पाएँगे एक दिन 

तुम्हारे हक़ सभी यह छीन लेंगे 

तुम्हे अख़बार में अपना कहेंगे 

तुम्हारी सिसकियों पर हंस के तुमसे टैक्स लेंगे 

बड़े नादान हो  तुम

सियासत की पकड़ में आ गए हो 

तुम्हारी नब्ज़ जिनके हाथ में है 

तुम्हारी जान का सौदा करेंगे II

मुझे अफ़सोस है तुम देर से समझोगे यारा  

बड़ा पछताओगे जब मिन्नतें ये न सुनेंगे 

तुम्हारे खाव्ब कुचलेंगे वो अपने मंहगे जूतों से 

तुम्हारा बैल खूंटे पर मरेगा भूख से रो के 

यह सब मिलकर तुम्हारी चीख पर उत्सव करेंगे 

तुम्हे इतिहास यादों का सदी तक गालियां देगा 

काश ! तुम वक़्त रहते जाग जाते 

खैर..अब मुमकिन नहीं है II

©kaladharpanakz