जो देख पा रहे हों ख़ुद को दर्द में शामिल
आवाज़ आप की फिर खुलकर दाद में आए

ग़म का क़ब्ज़ा है उसके बाद से ही मुझ पर
ख़ुशियाँ लेकर जो आए तादाद में आए 
Pankaj murenvi