कुछ नए ज़र्द से ख़्वाब लिखे हैं इन दिनों और तुम्हारे सिरहाने तले सब रख छोड़े हैं, पुरानी यादों की बारिश से भीगी हुई वो रातें और आँखों से किये वादे जो तुमने तोड़े हैं। ​मुड़कर उन दिनों को जीने की मेरी कोशिश और तुमने मेरे लिखे खत भी तो अब मोड़े हैं, मुझे उन अनकहे वादों को निभाने की ज़िद्द और तुमने कुछ नए चमकते सितारे बटोरे हैं।