जब कड़ाके की ठंड पड़ती है
और ये जैकटें ठंड को नहीं रोक पाती
तो तुम्हारा स्वेटर पहन कर निकलता हूँ
और तुम्हारे लगाये फंदों में सर्दी झूल जाती है
झूले भी क्यों न
ठंड को भी पता है कि माँ ने यह स्वेटर काँपते हुए बुनी है
आज जब रिश्तों को बिखरते देखता हूँ
तो तुम्हारा स्वेटर बुनना बहुत याद आता है
एहसासों का ऊन लेकर
ममता और धैर्य की दो सलाइयों से तुम जीवन को
बुन देती थी
और कहती थी कि खाली हूँ स्वेटर बुन रही हूँ
अब लगता है कि तुम खाली समय में स्वेटर नहीं बुनती थी
बल्कि समय स्वेटर बुनते देख खाली हो जाता था
तुम स्वस्थ रहो या बीमार
घर में रहो या बाजार
ये सलाइयां थमने का नाम ही नहीं लेती थी
माँ ने उस दिन के बाद जहाज से सफर ही नहीं किया
जिस दिन उनकी सलाइयां पर्स से निकाल ली गईं थीं
सलाइयों को ऊंचाइयों का अनुशासन नहीं भाता
मैं हर विशेष मौके पर इस स्वेटर को पहनता हूँ
जिसके कुछ फंदे उधड़ गये हैं
एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में सूटबूट टाई वाले
मुझे देखकर हंस रहे थे,मैं उन पर हंस रहा था
शायद उनकी माँ ने उनके लिए स्वेटर नहीं बुनी होगी
माँ की स्वेटर ने सिखाया है
बने हुए और बुने हुए में बड़ा अंतर होता है
बना हुआ सलीके से बनता तो है
लेकिन उधड़ता बेतरतीब है
बुना हुआ उधड़ता भी सलीके से है
माँ की स्वेटर जब बुन जाती थी
वो मुझे पहना कर इठलाती थी
माँ आज भी तुम ठीक वैसे ही इठलाती होगी
तुमने सर ऊंचा करना सिखाया है
शायद इसीलिए स्वेटर में कॉलर नहीं लगाया है
एक राज की बात बताऊं
जब मैं यह स्वेटर पहन कर बेटी को गले लगाता हूँ
तुमको आत्मा के बेहद करीब पाता हूँ


