थोड़ी सी ख़ामोशी है,
या फ़िर कुछ मदहोशी है।
एक सुबह की तलाश है,
बहुत दिन से यह कयास है।
गहरी सी ख़ामोशी है,
शायद हर किसी को होती है।
यह तो बस शुरुआत है,
बहने वाले कुछ जज़्बात हैं।
बिछड़न सी ख़ामोशी है,
जो मेरे सूनेपन को छूती है।
एक एहसास जो अब दरकिनार है,
मेरे ख़्वाबों की उड़ान को तैयार है।
अंधेरी रात सी ख़ामोशी है,
जो एक और प्रयास को कहती है।
मनभावन की एक उत्तेजना है,
हो न हो, सफलता में मुझे भीगना है।
ख़ालीपन की ये ख़ामोशी है,
जो मिथ्या विचारों से उत्पन्न होती है।
इसी को बार-बार दबाना है,
और मुझे आगे बढ़ते जाना है।
और मुझे आगे बढ़ते जाना है।


