तेरे खामोश होने की, क्या थी वज़ह,
कि फिर न लौट आने की, क्या थी वजह।
तेरे होने न होने का अब फर्क नहीं पड़ता,
साथ होकर भी साथ न होने की, क्या थी वज़ह।
बीती बातों का क्यों अफसोस है तुझे,
ग़ज़ल लिखने की, क्या यही थी वज़ह।
मग़रूर कुछ हुए वो इस तरह,
दिल टूट बिखरने की, क्या यही थी वज़ह।
बातें तुम करती हो फ़लां फ़लां की,
ख़ुद से बिछड़ने की, क्या यही थी वजह।