बीच राह में क्यों रुका तू पथिक, तेरे पास कौन सा बैसाखी है,
यू मत हो मायूस मुश्किलों से,
अभी लक्ष्य के लिए बहुत चलना बाकी है।
मत करो तुलना तुम किसी से,
तुम ही हो जिसने अपनी छमता मापी है,
कोई और तुम्हें क्या लक्ष्य बताएगा,
तुम निर्णय करो तुरन्त, अभी संघर्ष बहुत बाकी है।
अपना लक्ष्य दूर देखकर मत घबराओ,
धीरे धीरे एक एक पग बढाओ,
राह की मुश्किलें ये पग दूर कर देंगे,
तुम्हे बस इन छोटे कदमों पर विश्वास करना बाकी है।
आसपास के सगे संबंधी,
करेंगें कोशिश आत्मविश्वास गिराने की,
मत विचलित होना उनकी बातों से,
धैर्य तुम्हारे पास अभी बहुत बाकी है।
मत करना ईर्ष्या तुम,
किसी विजेता से कभी,
उसने भी कदम बढ़ाए थे कभी,
तुम्हें तो कदम बढ़ाना अभी बाकी है।
मत होना हतोस्ताहित कभी,
पराजित हुए राही से,
वो भी तुम्हे बहुत सिखाएगा,
बस निरंतर कोशिश करना सीखना अभी बाकी है।
समय की पाबंदिया जरूरी होती हैं,
लक्ष्य पूरा करने निकले पथिक की,
इसलिए रहो पाबंद हमेशा समय के,
मार्ग में संदेह और भय से बचना अभी बाकी है।
मत करना घमंड,
एक विजय पाने के बाद,
एक ही विजय काफी नहीं है तुम्हारे लिए,
अभी तो पूरा आसमान जीतना बाकी है।