माँ , अब मैं बड़ा हो गया हूँ
तेरी याद से दूर कहीं खो गया हूँ
अब मुझे तेरी याद नहीं आती
न रात ,न दिन, कभी भी नहीं सताती
एक वक्त था ,एक वक्त था आने का प्रश्न ही ना था,
जाती ही न थी,
आज वक्त ही नहीं जो आएगी,
पल भर भी न सताएगी
बड़ा होने के साथ गरीबी आई
सबसे कीमती वक्त की कमी ले आई
ये याद तो वक्त के रास्ते पर चलती है ,
जिधर खाली देखा उधर ही निकलती है,
चारों ओर से घिर गए हैं रास्ते, चारों ओर से घिर गए हैं रास्ते
एक भी खाली नहीं तेरी याद के वास्ते
एक भी खाली नहीं तेरी याद के वास्ते