- क्या वो तुम थी ?
आज भी जब उस शहर की उन तंग गलियों से गुज़रता हूँ , या उन दुकानों से गुज़रता हूँ , जहाँ तुम रहती थी , तो तुम वही कही महसूस होती हो ,
ऐसा लगता है जैसे मेने तुम्हे वहाँ देख लिया , और फिर पलट कर देखा तो तुम वहां नही थी , शायद वो तुम्हारे जैसी थी , तुम पहले जैसी दिखतीं थी वैसी या अब जैसी तुम दिखती हो ,
रोज़ तुम्हारे जैसे कई दिखते है मुझे , मगर तुम्हारे दिखने जैसा दिखना किसी में नही है ,
और अब वो जगह भी वैसी नही दिखती है , वहां नई बड़ी सी दुकानें बन गई है , सब कुछ नया सा दिखता है सज़ा हुआ ।
और में भी , अब वैसा नही दिखता जैसा तुमने छोड़ा था , थोड़ा बदल गया हूँ , वज़न तो नही शायद , खराशें कुछ बढ़ गई है चहेरे पर।
- Pankaj Sharma
( @shabdh_)


