उम्र लंबी है मगर बितानी है
रात हिज्र की है कट जानी है
वादा किया है तुमसे
निभाएंगे जाँ देकर
साथ भी रहेगे उम्र भर
गर कुदरत की मेहरबानी है
ज़माने भर मे रुसवा हो रहे है
तुमको पाकर
दिल जो लगाया था
अब चोट भी खानी है
हर तरफ मंजर है जुदाई का
हम भी खामोश रहते है
कहीं खो ना दे तुमको
ये दुनिया बहुत वीरानी है
महफ़िल हजारों है
जलवे भी हजारों है
हम ना जायेगे कहीं
ये कैसी मनमानी है
उम्र लंबी है मगर बितानी है
रात हिज्र की है कट जानी है
रचनाकार-देवेन्द्र कुमार 'पंकज '


