सोचो मत ज्यादा, प्रवाह के साथ चल।

प्रयास अथक कर, परिणाम के साथ चल।

ना कर पश्चाताप , सोचकर ना हो कभी दुखी

अपना कर्म कर और चलता चल।


किया मैने वो जो दिल ने कहा, नियति को शायद ये मंजूर नही

जिससे बिछड़ कर दूर हुआ उसी से मिला दिया, नियति को शायद मंज़ूर यही।


अभी तक यकीं नही था, नियति भी कुछ होता है

जब पड़ा खुद का सामना , सीखा दिया मैं हूँ।


तुम सिर्फ सोच सकते है, नियति तुमसे करवाएगा

तुम जो ना चाहते हो वो भी करवाएगा।


दुख नही अब किसी बात का , मंजिल कुछ और ही थी।

हम तो भटके मुसाफिर थे, उपरवाले ने रास्ता भी दिया और मंज़िल भी।


जीवन चक्र कुछ ऐसा चला, फिर से पाता हूँ खुद को उसी रास्ते पर।


आवरण नया, तथ्य वही , सत्य वही, फिर से आ गया हूँ उसी पथ पर।


है कुछ मेरे तकदीर में जो मुझे पता नही पर इतना पता है जीवन में उतार चढ़ाव और है अभी।


उमंग नयी , तरंग नया, लोग नये, जगह नयी, हूँ वही जो मैं मैं था कर रहा हूँ कोशिश।