मोहन ,मुरली सुनने आयी 

हर धागे को छोड़ मैं आयी

मोहन ,मुरली सुनने आयी 

बरसाने की वैरागी ,

बनने सदा-सुहागिन द्वारिका आयी 

मोहन ,मुरली सुनने आयी 

मन व्याकुल ,कर्ण हैं आतुर

प्रीति तुम्हारी बन गयी तीर 

मोहन ...

रास रचाओ रासेश्वर 

रीत निभाओ मनोहर 

मोहन ,मुरली सुनने आयी 

हर धागे को छोड़ मैं आयी

मोहन .... 

         - गुनहगार