यही व्यथा मेरी कथा है ,
मैं शिव नही जो विष पी कर नीलकंठ बन जाऊं
प्रतिकार - प्रतिषोध ,स्मरण -विष्मरण का द्वंद है ,
अनुराग - द्वेष का रण है ,
प्रतिबिम्बों में आतित्व खोजता ,
स्वयं को रेखाओं में खिंचता ,
यही व्यथा मेरी कथा है
मैं शिव नही जो विष पी कर नीलकंठ बन जाऊं
- गुनहगार


