लफ़्ज़ों से ख़ता हो जाएगीये कह न सकेंगे बात हमारीदेखो आँखें क्या कहती हैएक उम्र छिपाये बैठी हैंकभी चांदनी की तपिशकभी अमावस से मोहब्बतकभी शाम से नफ़रतकभी रात से दीवानगीक्या क्या बयां करेंगे येलफ़्ज़ों से ख़ता हो जाएगी...गुनहगार