राम चरण रज है अति पावन, राम नाम जीवंत सुखावन।राघव नयन है कमल समाना, मंत्र मुग्ध भए सब जग जाना।जनक सुता को वर घर आए, अवधपुरी में उत्सव छाए।राम लखन शत्रुघ्नहु भरता, सकल जगत के तारन करता।
राम चरण रज है अति पावन, राम नाम जीवंत सुखावन।राघव नयन है कमल समाना, मंत्र मुग्ध भए सब जग जाना।
जनक सुता को वर घर आए, अवधपुरी में उत्सव छाए।राम लखन शत्रुघ्नहु भरता, सकल जगत के तारन करता।